भारत के प्राचीन ऋषि मनीषियों ने लम्बी साधना एवं गहन अध्ययन के द्वारा शरीर को स्वस्थ एवं दीर्घायु रखने के लिये विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों को विकसित किया। उनमें से ‘‘मुद्रा विज्ञान’’ एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमें हाथों की अंगुलियों व अँगूठे के उपयोग के द्वारा ही चिकित्सा का लाभ प्राप्त किया जा सकता है। चिकित्सा पद्धति में हठ योग के आसन, प्राणायाम एवं बंध की कुछ जानकारी अधिकांश लोगों को है परन्तु मुद्राओं की जानकारी एवं उनके अद्भुत प्रभाव से अधिकांश जन अपरिचित हैं। आइए, कुछ मुद्राएँ और उनके प्रभाव से परिचित होते हैं –
विधि –
अपने दोनों हाथों को जंघाओं पर रखें। अँगूठे को कनिष्ठा (सबसे छोटी अंगुली) की जड़ में लगाकर धीरे-धीरे श्वांस भरते हुए अपनी चारों अँगुलियों से अँगूठे को घेरकर मुट्ठी बन्द कर लें और ओम् की लम्बी ध्वनि सात बार करें और ध्वनि की गूंज को दाहिने कान से सुनें। धीरे-धीरे श्वांस बाहर निकालते हुए पेट की मांसपेशियों को संकुचित करके उड्डियान बन्ध लगाएं। अब अपने हाथ खोलें और कल्पना करें कि आप की सारी चिंताएं, सारे भय एवं सारे दुःख दूर हो रहे हैं।
इस सम्पूर्ण क्रिया को कम से कम 7 बार करें।
लाभ –
- इस मुद्रा को करने से मानसिक अवसाद (Dipression) दूर होता है।
- यह मुद्रा उदासी को दूर करती है, दुर्भाग्य से बचाती है क्योंकि मानसिक अवसाद में कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती है।
- हमारे अन्दर नई ऊर्जा एवं नया उत्साह पैदा होता है।
- यह मुद्रा हमारे मस्तिष्क को बल प्रदान करते हुए मानसिक शक्तियों में वृद्धि करती है। जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
- अपने शरीर में लगभग 80ः भाग जल ही है। रक्त का भी लगभग 80 से 90ः भाग जल ही है। अपने रक्त का 25ः भाग केवल मस्तिष्क की ही आवश्यकता है। रक्त एवं जल की थोड़ी सी कमी होने पर अपना मस्तिष्क ठीक से काम नहीं करेगा। इसी से उदासी, अवसाद (Dipression)आरम्भ हो जाता है।
- इस मुद्रा में जब अँगूठे को कनिष्ठा की जड़ में लगाते हैं, तब जल तत्व बढ़ता है। इसका मस्तिष्क पर, सीधा सकारात्मक प्रभाव होता है।
- इसके साथ जब श्वांस भरते हुए ओम् की लम्बी ध्वनि करते हैं तो इस ध्वनि की तरंगें मस्तिष्क को बल प्रदान करती हैं। मानसिक रोगों को दूर करने की यह चमत्कारी मुद्रा है।
- इस मुद्रा को करने के बाद हाथ-पैरों को तानें तो लाभ ओर बढ़ जायेगा।
विशेष- मानसिक कार्य अधिक करने वालों को प्रत्येक घंटे के बाद एक गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए।
श्रीवर्धन
लेखक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक हैं।
साथ ही योग, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर एवं मुद्रा विज्ञान
के सिद्धहस्त एवं अभिनव शोधकर्ता भी हैं।











