लपेटे सारे चाँद तारे
नीलांबर सा गहरा
पूरा ब्रह्मांड इस में समाया
दुनिया से बचाए मेरी माँ का आँचल
जैसे मुझ पर पहरा।
ैं उनकी प्यारी सी गुड़िया
उनकी आँखों का तारा
ममता का सागर
नरम मुलायम मेरी माँ का आँचल
जैसे अमृत की गागर।
शोक शूल से अभेद
निश्चितता से गाडा
लिए फूलों की सारी कोमलता
शीतल निर्मल मेरी माँ का आँचल
जैसे नीम की छाया।
एक छोटा सा काला टीका
दुनिया की नजरों से बचाता
मुस्कान बरसाता प्यार लुटाता
लोरी गाता मेरी माँ का आँचल
जैसे मेरे सपनों को सहलाता ।
गरिमा खण्डेलवाल D/o श्री कैलाश चंद्र खण्डेलवाल



