मुद्रा विज्ञान भारत के प्राचीन ऋषि मनीषियों ने लम्बी साधना एवं गहन अध्ययन के द्वारा शरीर को स्वस्थ एवं दीर्घायु रखने के लिये विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों को विकसित किया। उनमें से ‘‘मुद्रा विज्... Read more
विधि :- बाएं हाथ के अँगूठे को दाहिने हाथ की हथेली पर रखकर उसकी मुट्ठी बंद कर लें एवं दाहिने हाथ के अँगूठे को बाएं हाथ की मध्यमा के अग्र भाग से मिला लें। बाएं हाथ की चारों अंगुलियां आपस में म... Read more
इसे सूकरी मुद्रा अथवा समन्वय मुद्रा भी कहते हैं। विधि – अपने हाथों की चारों अंगुलियों एवं अँगूठे के अग्र भाग को मिलाने से यह मुद्रा बनती है। अवधि – दिन में 5 बार, 5-5 मिनट के लिए... Read more
व्यान मुद्रा विधि – तर्जनी, मध्यमा और अँगूठे के अग्र भागों को मिलाने से यह मुद्रा बनती है, शेष दोनों अंगुलियों को सीधा रखना है। ध्यातव्य – अग्नि, वायु एवं आकाश तत्वों का विकास हो... Read more
विधि – मध्यमा एवं अनामिका अंगुलियों के शीर्ष भाग को अँगूठे के अग्र भाग से मिलाना, शेष दोनों अंगुलियाँ सीधी रखनी हैं। ध्यातव्य – पृथ्वी तत्व, आकाश तत्व एवं अग्नि तत्व के मिलने से... Read more
विधि :- कनिष्ठा एवं अनामिका अंगुलियों के अग्र भाग को अँगूठे के अग्रभाग से मिलाएं। शेष दोनों अंगुलियां सीधी रखनी हैं। ध्यातव्य :- जल तत्व, पृथ्वी तत्व और अग्नि तत्व तीनों के मिलने से यह मुद्र... Read more
विधि :- कनिष्ठा (सबसे छोटी अंगुली) को मोड़ कर, अंगुष्ठ मूल से लगाकर अँगूठे से दबाने पर यह मुद्रा बनती है। अवधि :- 30 मिनट से 45 मिनट तक। लाभ :- जब शरीर में जल तत्व की अधिकता हो जाती है तो इस... Read more
योग हमारे जीवन को सरल बनता है। आज के समय मे लोगो का जीवन बहुत ही व्यस्त हो गया है। ज्यादातर लोग अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नही देते हैं और बस पैसे कमाने की दौड़ मे लगे हुए हैं। इस भागदौड़ भरी जिं... Read more
मुद्रा विज्ञान भारत के प्राचीन ऋषि मनीषियों ने लम्बी साधना एवं गहन अध्ययन के द्वारा शरीर को स्वस्थ एवं दीर्घायु रखने के लिये विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों को विकसित किया। उनमें से ‘‘मुद्रा विज्... Read more
आपके व्यक्तित्व को निखारने में लंबाई की अहम् भूमिका होती है। प्रायः ऐसा देखा जाता है जिन लोगों की लंबाई कम होती है वे काफी शर्मिंदगी महसूस करते हैं। जिसकी वजह से उनमें आत्म विश्वास की... Read more






