यह सच है कि यदि हम उनके आदर्शों को आत्मसात कर लें, तो हमारे जीवन की अनेकानेक समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने अधर्म को सहन न करने का संदेश सभी को दिया, जो कि आज के समय की भी प्रबल आ... Read more
हमारे सामाजिक जीवन में कुछ ऐसे दिन आते हैं जिनसे मात्र एक व्यक्ति या परिवार ही नहीं वरन् पूरा समाज आनंदित और उल्लासित होता है। भारत को यदि पर्व-त्योहारों का देश कहा जाए तो समीचीन ही होगा। क्... Read more
लगभग 200 वर्षों की गुलामी के पश्चात् 15 अगस्त सन् 1947 के दिन भारत आजाद हुआ। पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। उनके बढ़ते हुए अत्याचारों से सारे भारतवासी त्रस्त हो गए और तब विद्रोह की ज्वाला भड़क... Read more
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। ऋषि पराशर और सत्यवती के पुत्र और महाभारत, वेद, उपनिषद और पुराणों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म भी इसी दिन ह... Read more
भारतीय नव वर्ष का पहला दिन यानी सृष्टि का आरम्भ दिवस, युगाब्द और विक्रम संवत् जैसे प्राचीन संवत का प्रथम दिन, श्रीराम एवं युधिष्ठिर का राज्याभिषेक दिवस, मां दुर्गा की साधना चैत्र नवरात्रि का... Read more
यह 24 मार्च 1931 की सुबह थी। और लोगों में एक अजीब सी बेचैनी थी। एक खबर लोग आसपास से सुन रहे थे और उसका सच जानने के लिए यहां-वहां भागे जा रहे थे और अखबार तलाश रहे थे। यह खबर थी सरदार भगत सिंह... Read more
होली का पर्व मात्र परंपरागत उत्सव ही नहीं अपितु जीवन का मनोविज्ञान है, इसका एक सामाजिक दर्शन है। पर्व और त्योहारों की सांस्कृतिक स्वीकृति ही इसलिए है कि समाज का प्रबुद्ध वर्ग इसे समझेगा, समा... Read more
कुम्भ का शाब्दिक अर्थ है कलश और यहाँ ‘कलश’ का सम्बन्ध अमृत कलश से है। बात उस समय की है जब देवासुर संग्राम के बाद दोनों पक्ष समुद्र मंथन को राजी हुए थे। मथना था समुद्र तो मथनी और नेति भी उसी... Read more
परस्पर संबंधों पर आधारित है जिन्दगी। संबंध की पवित्रता को ठीक समझकर परस्पर पूरक जीवन जीने से ही ऐश्वर्य की प्राप्ति कर सकते हैं। इस तत्व को श्री कृष्ण जी ने बहुत ही रोचक ढंग से भगवदगीता में... Read more
लगभग 200 वर्षों तक अंग्रेजों की गुलामी के पश्चात 15 अगस्त सन् 1947 के दिन हमारा भारतदेश आजाद हुआ। अंग्रेजों के अत्याचारों और अमानवीय व्यवहारों से त्रस्त भारतीय जनता एकजुट हो, इससे छुटकारा पा... Read more






