प्यारी-सी चिड़िया
सूरज उगने के संग ही,
आसमां में खो जाती है,
प्यारी-सी आवाज सुनाकर,
खुश बहुत वो करती है ,
प्यारी-सी चिड़िया मेरी,
मन को बहुत लुभाती है।
नन्हें-नन्हें पंखों से,
जब आँगन में आती है,
धीरे-से दाना लेकर,
जल्दी से उड़ जाती है,
प्यारी-सी चिड़िया मेरी,
मन को बहुत लुभाती है।
किसी पेड़ पर जब अपना,
नीड़ वो बनती है, सारा जहां घूमकर,
वापिस घर फिर जाती है,
प्यारी-सी चिड़िया मेरी,
मन को बहुत लुभाती है।
शिवानी इन्द्रा तिवारी






