है, अभी कुछ जो कहा नहीं गया । उठी एक किरण, धायी, क्षितिज को नाप गई, सुख की स्मिति कसक भरी, निर्धन की नैन-कोरों में काँप गई, बच्चे ने किलक भरी, माँ की वह नस-नस में व्याप गई। अधूरी हो पर सहज थ... Read more
छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी नये दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी … आज पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ चुके हैं क्या देखें उस मंजिल को जो छोड़ चुके हैं चाँ... Read more
मेह बरसने वाला है मेरी खिड़की में आ जा तितली। बाहर जब पर होंगे गीले, धुल जाएँगे रंग सजीले, झड़ जाएगा फूल, न तुझको बचा सकेगा छोटी तितली, खिड़की में तू आ जा तितली! नन्हे तुझे पकड़ पाएगा, डिब्बी मे... Read more
प्यारी-सी चिड़िया सूरज उगने के संग ही, आसमां में खो जाती है, प्यारी-सी आवाज सुनाकर, खुश बहुत वो करती है , प्यारी-सी चिड़िया मेरी, मन को बहुत लुभाती है। नन्हें-नन्हें पंखों से, जब आँगन में आती... Read more
ईश्वर को सब पूजते, जाते मंदिर धाम। मात-पिता के चरणों में, बसे हैं चारों धाम। उनकी सेवा मात्र से, प्रसन्न हो भगवान। जन्म सफल हो जायेंगे, करो यदि ये काम ।। १।। मानव सेवा जो करे, वो सदा सुख पाए... Read more
जीवन-पथ जो कंटकमय हो विपदाओं का घोर वलय हो किन्तु कामना एक यही बस प्रतिपल पग गतिमान चाहिए ।। १।। हास मिले या त्रास मिले विश्वास मिले या फाँस मिले गरजे क्यों न काल ही सम्मुख जीवन का अभिमान चा... Read more
हर इक मूरत जरूरत भर का, पत्थर ढूंढ लेती है कि जैसे नींद अपने आप, बिस्तर ढूंढ लेती है अगर हो हौसला दिल में, तो मंजिल मिल ही जाती है नदी खुद अपने कदमों से, समन्दर ढूंढ लेती है तू नदी है तो अलग... Read more
आओ मन की गाँठे खोलें यमुना तट, टीले रेतीले, घास-फूस का घर हांडे पर गोबर सी लीपे आँगन में तुलसी का बिरवा, घंटी स्वर मां के मुंह से रामायण के दोहे-चैपाई रस घोले आओ मन की गांठे खोलें। बाबा की ब... Read more
हँसता हूँ – मुस्कुराता हूँ, चलता जाता हूँ ना थकता और न घबराता, रंग दिखाता हूँ।। ना दिल दुखाता हूँ और ना रोब जमाता हूँ अपने कर्म और दम पर, मैं खून बहाता हूँ बाधाओं अड़चनों को मैं, मसलता... Read more






