शपथ लेना तो सरल है, पर निभाना ही कठिन है। साधना का पथ कठिन है, साधना का पथ कठिन है ।।।। शलभ बन जलना सरल है, प्रेम की जलती शिखा पर। स्वयं को तिल-तिल जलाकर, दीप बनना ही कठिन है ।।1।। हैं अचेतन... Read more
एक बार फिर हारी हुई शब्द-सेना ने मेरी कविता को आवाज़ लगाई – “ओ माँ! हमें सँवारो। थके हुए हम बिखरे-बिखरे क्षीण हो गए, कई परत आ गईं धूल की, धुँधला सा अस्तित्व पड़ गया, संज्ञाएँ खो चुके... Read more
बादलों से उतरी झमाझम बौछार से। अंबर से धरती पर बरसते प्यार से। प्रकृति के हरियालिवी शृंगार से। गुदगुदाती पवन के संग नशीली फुहार से। कौन है जिसका न झूम जाए मन ।1। नदियां व झील, सरोवर लगे भरने... Read more
उठना है तुझे नहीं गिरना है, जो गिरा तो फिर से उठना है, अब रुकना नहीं इक पल तुझको, बस हर पल आगे बढ़ना है, राहों में मिलेंगे तूफान कई, मुश्किलों के होंगे वार कई, इन सबसे तुझे न डरना है, तू लक्ष... Read more
प्यार के दो अल्फाज़, तुम मुस्कुरा के बोल देना… कोई रुठे जो तुमसे, तो उसे प्यार से मना लेना… रब की इस दुनिया में, सबकी किस्मत एक सी कहां… दिखे जो कोई बेबस, तो उसे गले से लगा... Read more
जिदगी ने कर लिया स्वीकार, अब तो पथ यही है। अब उभरते ज्वार का आवेग मद्धिम हो चला है, एक हलका सा धुंधलका था कहीं, कम हो चला है, यह शिला पिघले न पिघले, रास्ता नम हो चला है, क्यों करूँ आकाश की म... Read more






