महामना पंडित मदन मोहन मालवीय हिन्दुत्व की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे। वे उन तेजस्वी महापुरुषों में से थे, जिन्होंने हिन्दी- हिन्दू-हिन्दुस्तान के लिए ही जन्म लिया था और अपने जीवन के अंतिम समय त... Read more
सिख पंथ के संस्थापक प्रथम पातशाह साहिब श्री गुरु नानक देव जी महान् आध्यात्मिक चिंतक व समाज सुधारक थे। अपनी चार उदासियों के दौरान आप विश्व के अनेक भागों में गए और मानवता के धर्म का प्रचार किय... Read more
‘सभ महि जोति-जोति है सोई, तिस दै चानणि सभ मंहि चानणु होई।’ गुरु नानक देव जी द्वारा मानवता को दिखाया गया मार्ग, धर्म और आध्यात्म, लौकिक तथा पारलौकिक सुख-समृद्धि के लिए श्रम, शक्ति एवं मनोयोग... Read more
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन की मौलिकता और उनसे जुड़ी घटनाएं उनके जीवन दर्शन को समझाती हैं। भारत की आजादी में उनकी भूमिका सर्वविदित है। भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी विचारधारा... Read more
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि साफ-सफाई, ईश्वर भक्ति के बराबर है और इसलिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा दी थी और देश को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उनका कहना था... Read more
महात्मा गांधी को धार्मिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक मामलों में सामान्यतया परंपरावादी तथा अनुदार माना जाता है। किंतु जहां तक हिंदू समाज में महिलाओं की स्थिति का प्रश्न है, गांधीजी ने जो दृष्टि ब... Read more
सत्य, अहिंसा, शांति और सद्भाव के उपासक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150 वीं जयंती तथा विश्व अहिंसा दिवस पर समुत्कर्ष के पाठकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। बापू ने प्रत्येक भारतव... Read more
होनहार बिरवान के होत चीकने पात’ कहावत के दो उदाहरण याद आते हैं। बचपन में श्रवण कुमार और सत्यवादी राजा हरिशचंद्र का नाटक बाइस्कोप में देखकर गांधी जी माता-पिता की आज्ञा पालन और सत्य बोलने की आ... Read more
भारत में ब्रिटिश अफसरों द्वारा किये गये अपमान का बदला लेने के लिए मदन लाल धींगरा द्वारा ब्रिटिश अधिकारी कर्जन वाइली की हत्या की घटना की सूचना पाकर गांधी जी विचलित हो उठे थे। उन्हें इस बात से... Read more
मोहनदास करमचन्द गांधी (2 अक्टूबर 1869 – 30 जनवरी 1948) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अ... Read more






