रानी चेन्नम्मा का जन्म सन् 1778 में काकतीय राजवंश में हुआ था। चेन्नम्मा के पिता का नाम घुलप्पा देसाई और माता का नाम पद्मावती था। चेन्नम्मा के माता पिता दोनों सद्गुण संपन्न वीर और देशभक्त थे।... Read more
भारत में पुरुषों के साथ ही भारतीय महिला दार्शनिकों तथा साध्वियों की लम्बी परंपरा रही है। वेदों की ऋचाओं को गढ़ने में भारत की बहुत-सी स्त्रियों का योगदान रहा है उनमें से ही एक है गर्गवंश में व... Read more
‘महाभारत’ के वन पर्व में सावित्री और यमराज के वार्तालाप का प्रसंग आता हैः जब यमराज सत्यवान (सावित्री के पति) के प्राणों को अपने पाश में बाँध ले चले, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी। उ... Read more
आप के सामने इस अंक में एक माँ की सच्ची कथा प्रस्तुत की जा रही है जो भारतीय इतिहास में कहीं दबी पड़ी लुप्त प्राय ही थी। एक ऐसी माँ की कहानी जिसने अपनी संतानों को अपनी मीठी – मीठी लोरियां... Read more
माँ शबरी को श्रीराम के प्रमुख भक्त ों में गिना जाता है। शबरी का वास्तविक नाम ‘श्रमणा’ था। वह भील समुदाय की ‘शबरी’ जाति से थी। शबरी के पिता भीलों के राजा थे। शबरी जब विवाह के योग्य हुई तो उसक... Read more
एक बार सप्तर्षि गण बदरपाचन तीर्थ हिमालय पर्वत पर बारह वर्ष के लिए तपस्या करने चले गए। वे अरुंधति को जंगल में बने आश्रम में अकेला छोड़ गए। कहते हैं कि इस बीच भयंकर अकाल पड़ा, जो बारह साल तक चला... Read more
16 नवंबर 1926 की घटना है। शहर था लाहौर, भगत सिंह, भगवती चरण बोहरा समेत कई क्रांतिकारी इकट्ठे थे। बीच में एक फोटो पर माला पड़ी हुई थी। वो तस्वीर थी करतार सिंह सराभा की, 19 साल की उम्र में अमेर... Read more
यह परतंत्र भारत के उस काल की घटना है, जब राजस्थान में छोटी बड़ी अनेक रियासतें थी। इन रियासतों में एक रियासत डूंगरपुर थी। जिसके शासक महारावल लक्ष्मण सिंह थे। इस समय भारत पर पूर्ण रूप से अंग्रे... Read more
उस छोटे-से शहर में लाल बहादुर की स्कूली शिक्षा कुछ खास नहीं रही लेकिन गरीबी की मार पड़ने के बावजूद उनका बचपन पर्याप्त रूप से खुशहाल बीता। उन्हें वाराणसी में चाचा के साथ रहने के लिए भेज दिया ग... Read more
भारतीय स्वातन्त्र्य आन्दोलन सत्याग्रह से स्वतंत्रता : महात्मा गाँधी राष्ट्रवाद के इतिहास में प्रायः एक अकेले व्यक्ति को राष्ट्र-निर्माण के साथ जोड़कर देखा जाता है। उदाहरण के लिए, हम इटली के न... Read more






