एक शिष्य था समर्थ गुरु रामदास जी का जो भिक्षा लेने के लिए गांव में गया और घर-घर भिक्षा की मांग करने लगा। समर्थ गुरु की जय! भिक्षा देहिं…. समर्थ गुरु की जय! भिक्षा देहिं…. एक घर क... Read more
मासूम गुड़िया बिस्तर से उठी और अपना गुल्लक ढूँढने लगी… अपनी तोतली आवाज में उसने माँ से पूछा, ‘‘माँ, मेला गुल्लक कहाँ गया?’’ माँ ने आलमारी से गुल्लक उतार कर दे दिया और अपने काम में व्यस्... Read more
एक धनी सेठ था। उस सेठ के पास सुख सुविधा के लिए ऐसी सभी वस्तुएं थी जो ऐशो आराम से रहने के लिए उचित मानी जाती है। उसकी एक पुश्तैनी हवेली भी थी जो बहुत विशाल थी और जिसकी उसे साफ-सफाई करवानी थी।... Read more
एक गाँव में एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह जंगल से लकड़ियाँ काट कर लाता और उन्हें बेचकर अपना गुजारा करता था। एक दिन वह नदी के किनारे पेड़ पर चढ़कर लकड़ियाँ काट रहा था। अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ा छू... Read more
बाज के बच्चे ने अभी-अभी उड़ना सीखा था३ उत्साह से भरा होने के कारण वह हर किसी को अपनी कलाबाजियां दिखाने में लगा था। तभी उसने पेड़ के नीचे सूअर के एक बच्चे को भागते देखा, ”माँ वो देखो सूअर, कितन... Read more
एक आदमी की चार पत्नियाँ थी। वह अपनी चौथी पत्नी से बहुत प्यार करता था और उसकी खूब देखभाल करता व उस पर सबसे ज्यादा ध्यान देता था। वह अपनी तीसरी पत्नी से भी प्यार करता था और हमेशा उसे अपने मित्... Read more
चार चोर थे। चारों ही मिलकर चोरी करते थे और जो भी माल मिलता था, उसे आपस में बांट लिया करते थे। वे थे तो इकट्ठे, मगर थे बड़े स्वार्थी। हरेक चोर यही सोचता रहता था कि किसी दिन मोटा माल हाथ लगे तो... Read more
एक बादशाह सर्दियों की शाम जब अपने महल में दाखिल हो रहा था तो एक बूढ़े दरबान को देखा जो महल के सदर दरवाज़े पर पुरानी और बारीक वर्दी में पहरा दे रहा था…। बादशाह ने उसके करीब अपनी सवारी को... Read more
एक हवेली के तीन हिस्सों में तीन परिवार रहते थे। एक तरफ कुंदनलाल, बीच में रामचरण, दूसरी तरफ जसवंत सिंह। उसी दिन रात में बारह बजे रामचरण के बेटे पप्पू के पेट में दर्द हुआ कि वह दोहरा हो गया और... Read more
राजा जनक बहुत ज्ञानी थे परन्तु उनका ज्ञान किसी गुरू से प्राप्त नहीं था। उनकी किसी को गुरु बनाकर ज्ञान प्राप्त करने की तीव्र इच्छा हुई। कई दिनों तक विचार करने के बाद एक उपाय सूझा। उनका राज-का... Read more






