मोहम्मद बिन कासिम के आक्रमण से लेकर अब तक याने पिछले हजार – बारह सौ वर्ष अपने इस राष्ट्र को भीषण अंधकार से गुजरना पड़ा है। व्यक्तिगत गुण संपदा को सामूहिक पुरुषार्थ का जोड़ न मिल पाने से,... Read more
दीपावली एक साधारण पर्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और गौरव, जागरण का पर्व है। इसमें हमें एक समर्थ राष्ट्र के गौरव तथा गौरवशाली अतीत के दर्शन होते हैं। दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति का गौ... Read more
नारी सृष्टि का आधार है। नारी के बिना संसार की हर रचना अपूर्ण तथा रंगहीन है। नारी मृदु होते हुए भी कठोर है। उसमें पृथ्वी जैसी सहनशीलता, सूर्य जैसा ओज तथा सागर जैसा गांभीर्य एक साथ दृष्टिगोचर... Read more
व्यक्ति का समाज के प्रति वही दायित्व है जो अंगों का सम्पूर्ण शरीर के प्रति। यदि शरीर के विविध अंग किसी प्रकार स्वार्थी अथवा आत्मास्तित्व तक ही सीमित हो जायें, तो निश्चय ही सारे शरीर के लिए ए... Read more
ध्यान अपने में गहरी आध्यात्मिक प्रक्रिया है। ध्यान की अनेकानेक विधियाँ प्रचालन में हैं। पर उसका सार यही है कि हम अपने विचारों और भावनाओं को श्रेष्ठता- महानता और व्यापकता में एकाग्र करना सीखे... Read more
आज के तकनीकी युग में युवा वर्ग जीवन में सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए लालायित है, लेकिन थोड़ा-सा परिश्रम या फिर कड़ी मेहनत के बावजूद नकारात्मक परिणाम उन्हें पूरी तरह से निराश कर देता है। यही वक्त... Read more
युवाओं में संकल्प शक्ति जाग्रत् होनी ही चाहिए, क्योंकि इसी में युवावस्था की सही व सार्थक परिभाषा निहित है। संकल्प शक्ति आध्यात्मिक ऊर्जा है। यह आत्मा का वर्चस् और व्यक्तित्व में स्फुरित होने... Read more
खोजें जीवन लक्ष्य, क्योंकि इसके बिना युवावस्था सही राह न खोज पायेगी। यौवन की शक्तियाँ यूँ ही बिखरती-बर्बाद होती रहेंगी। लक्ष्य की खोज न हो पाने पर हर राह भटकाती है। ओछे आकर्षण और उन्नींदें स... Read more
मानव के समग्र विकास में खेलों की अहम् भूमिका रही है। खेल, मनोरंजन के साधन और शारीरिक दक्षता पाने के एक माध्यम के साथ-साथ लोगों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने और उनके बीच के... Read more
“सूर्य की पहली छटा की अग्नि का है वास इसमें पूर्वजों की यह पताका विजय का विश्वास इसमें कोटि हृदयों के मिलन की भावना इसमें जुडी है। आज नव संवत्सर के पूजा की घड़ी है ….” नव सं... Read more






