चिड़ियाँ नाल मैं बाज लड़ावाँ, गिदरां नुं मैं शेर बनावाँ! सवा लाख से एक लड़ावाँ, ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ !! सिख परम्परा के दशम् गुरु श्री गोविंद सिंह द्वारा 17वीं शताब्दी में कहे गए ये शब्द आ... Read more
कर्मयोग का अर्थ अपने कर्म को पूरी एकाग्रता के साथ पूर्ण रूप से करना है और कोई भी कार्य पूर्णता के साथ तभी सम्भव है जब उसके साथ कुछ पाने की इच्छा न हो। उसका क्या परिणाम होगा। इस तरफ मन न ले ज... Read more
श्रीकृष्ण को हम महान् क्रांतिचेता नायक के रूप में स्मरण करते हैं। वे दार्शनिक, चिंतक, गीता के माध्यम से कर्म और सांख्य योग के संदेशवाहक और महाभारत युद्ध के नीति निर्देशक थे किंतु सरल-निश्छल... Read more
ज्ञात हो कि यह अवतार भगवान विष्णु ने वैवस्वत मन्वन्तर के अट्ठाईसवें द्वापर में श्रीकृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ से मथुरा के कारागर में लिया था। ये तो ईश्वर की एक लीला है कि भगवान ने गर्भ स... Read more
महापुरुषों का आदर्शमयी जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि हौंसलों की गर्जना के आगे प्रत्येक परेशानी सहम कर उलटे पाँव लौट जाती है। संयम और धैर्य की शीतलता के आगे धधकते ज्चालामुखी भी शांत हो जाते... Read more
श्रीकृष्ण का विराट व्यक्तित्व भारतीय इतिहास के लिये ही नहीं, विश्व इतिहास के लिये भी अलौकिक एवं आकर्षक व्यक्तित्व है और सदा रहेगा। उन्होंने विश्व के मानव मात्र के कल्याण के लिये अपने जन्म से... Read more
योगेश्वर श्रीकृष्ण भारतवर्ष की महानतम् विभूतियों में से एक थे। उनका जीवन समस्त मनुष्यमात्र के लिए प्रेरणास्रोत है। जहाँ पौराणिक बन्धु उन्हें भगवान मानते हैं, वहीं वैदिकधर्मी उन्हें महापुरुष... Read more
जंगल के एक बड़े वट-वृक्ष की खोल में बहुत से बगुले रहते थे। उसी वृक्ष की जड़ में एक साँप भी रहता था। वह बगुलों के छोटे-छोटे बच्चों को खा जाता था। एक बगुला साँप द्वारा बार-बार बच्चों के खाये जान... Read more
किसी घने वन में एक बहुत बड़ा शेर रहता था। वह रोज शिकार पर निकलता और एक ही नहीं, दो नहीं कई-कई जानवरों का काम तमाम कर देता। जंगल के जानवर डरने लगे कि अगर शेर इसी तरह शिकार करता रहा तो एक दिन ऐ... Read more






