वे भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्राचार्य और पहले किसान विद्यालय की संस्थापक थी। महात्मा ज्योति बा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के रू... Read more
भारत की वीरांगनाओं में रानी सारंधा का नाम बड़े ही सम्मान से लिया जाता है। सारंधा बुंदेला राजा चंपतराय की सहधर्मिणी थी। जब सारंधा छोटी ही अवस्था में थी, तभी से उसकी देशभक्ति उस पर हावी होने लग... Read more
इतिहास के उस दौर में जब नारी शक्ति का स्थान समाज में गौण था। शासन की बागडोर उपासक व धर्मनिष्ठ महिला को सौंपना इतिहास का अनूठा प्रयोग था। जिसने दुनिया को दिखा दिया कि शस्त्रबल से सिर्फ दुनिया... Read more
तत्कालीन कलकत्ता में प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर बनवाकर ‘जय काली, कलकत्ते वाली’ के जयकार उदघोष से कलकत्ता (बंगाल) को विश्व में पहचान दिलाने का श्रेय धींवर मूल की महीयसी वीरांगना रानी रास... Read more
रानी चेन्नम्मा का जन्म सन् 1778 में काकतीय राजवंश में हुआ था। चेन्नम्मा के पिता का नाम घुलप्पा देसाई और माता का नाम पद्मावती था। चेन्नम्मा के माता पिता दोनों सद्गुण संपन्न वीर और देशभक्त थे।... Read more
भारत में पुरुषों के साथ ही भारतीय महिला दार्शनिकों तथा साध्वियों की लम्बी परंपरा रही है। वेदों की ऋचाओं को गढ़ने में भारत की बहुत-सी स्त्रियों का योगदान रहा है उनमें से ही एक है गर्गवंश में व... Read more
‘महाभारत’ के वन पर्व में सावित्री और यमराज के वार्तालाप का प्रसंग आता हैः जब यमराज सत्यवान (सावित्री के पति) के प्राणों को अपने पाश में बाँध ले चले, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी। उ... Read more
आप के सामने इस अंक में एक माँ की सच्ची कथा प्रस्तुत की जा रही है जो भारतीय इतिहास में कहीं दबी पड़ी लुप्त प्राय ही थी। एक ऐसी माँ की कहानी जिसने अपनी संतानों को अपनी मीठी – मीठी लोरियां... Read more
माँ शबरी को श्रीराम के प्रमुख भक्त ों में गिना जाता है। शबरी का वास्तविक नाम ‘श्रमणा’ था। वह भील समुदाय की ‘शबरी’ जाति से थी। शबरी के पिता भीलों के राजा थे। शबरी जब विवाह के योग्य हुई तो उसक... Read more
एक बार सप्तर्षि गण बदरपाचन तीर्थ हिमालय पर्वत पर बारह वर्ष के लिए तपस्या करने चले गए। वे अरुंधति को जंगल में बने आश्रम में अकेला छोड़ गए। कहते हैं कि इस बीच भयंकर अकाल पड़ा, जो बारह साल तक चला... Read more






