उदयपुर। समुत्कर्ष समिति द्वारा ” रंग और उमंग का पर्व होली ” विषय पर 72 वीं समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि होली प्रेम का पावन पर्व है, रंगों का त्योहार है, हर्षोल्लास का, उमंग का पर्व है। होली सुसमृद्ध, गौरवशाली भारतीय संस्कृति का ऐसा अनूठा रंगों का त्योहार है जिसके रंग हमें केवल लुभाते ही नहीं, बल्कि हमारे मन और शरीर पर प्रत्यक्ष रूप से असर भी डालते हैं। होली रंगों का ऐसा पर्व है जिसे हर वर्ग,जाति,वर्ण-सम्प्रदाय के बच्चे-बड़े, नर-नारी सभी हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। रंगों का त्योहार होली वसंत का और समाज में सौहार्द का उत्सव होता है। इसे बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में भी मनाया जाता है।
विषय का प्रवर्तन करते हुए समुत्कर्ष पत्रिका के सम्पादक वैद्य रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने मातृ शत – शत वंदना गीत प्रस्तुत करते हुए कहा कि होली के रंगीले पावन पर्व में सभी प्रकार के भेद समाप्त होकर रंगों की छटा समाजव्यापी हो जाती है l सूरज की लाली, धरती की हरियाली, चंदा की चांदनी और गगन मण्डल में सतरंगी इंद्रधनुष समेत इस पंचभूत शरीर में भी कई तरह के रंगों का मिश्रण है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में विविध प्रकार के रंग समाहित हैं। समाज में हर रंग का अस्तित्व अलग है। प्रत्येक अपने आप में पूर्ण है किन्तु जब ये सब रंग एक साथ मिल जाते हैं तो सामाजिक एक्य की अद्भुत अनुभूति होती है।

बाल साहित्यकार तरुण कुमार दाधीच ने होली के रंग पर काव्य पाठ कर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के जो भी त्योहार हैं उनका वैज्ञानिक आधार है। त्योहारों का आनंद तो मिलजुल कर मनाने में है। सभी से आग्रह है कि होली के पर्व पर अभावग्रस्त लोगों के जीवन में खुशियों का रंग भरें। होली का पर्व वसंत ऋतु के आगमन की सुखद सूचना भी है। वसंत ऋतु नवसृजन व नवनिर्माण की ऋतु है। प्रकृति नवसृजन के लिए, परिवर्तन के लिए वसंत ऋतु में एक बेशकीमती मौका हमें देती है।
होली के वैज्ञानिक आधार का उल्लेख कर संदीप आमेटा ने बताया कि होली का त्यौहार प्रेम, भाईचारे एवं एकता का प्रतीक है। होली के विभिन्न रंग समरसता का सन्देश देते हैं। रंग,उमंग,हास-परिहास और उल्लास का त्योहार होली एक पवित्र त्यौहार है। सब लोग इस त्यौहार को मिलजुल कर बिना किसी भेद-भाव के एक साथ मनाते हैं, इसीलिए यह सामाजिक समरसता, समानता, एकता एवं मित्रता का सन्देश देने वाला पर्व है।
संचालन करते हुए विद्यासागर ने कहा कि आध्यात्मिक , धार्मिक होने के साथ ही यह सामाजिक एवं सांस्कृतिक त्योहार भी है। यह प्रेम, भाईचारे एवं राष्ट्रीय एकता का सन्देशवाहक भी है। इसे सभी लोग मिल जुल कर मनाते हैं। कोई बड़ा छोटा नहीं होता। इस दिन लोग अपनी पुरानी से पुरानी शत्रुता भुला कर हर्षोल्लास से सबसे मिल जुल कर पर्व मनाते हैं। यह पर्व वर्ण एवं जाति से ऊपर उठ कर मानवता का सन्देश देता है। सभी लोग एक ही रंग में रंग जाते हैं और वो है मानवता का रंग।
इस अवसर पर लोकेश जोशी, राजेन्द्र बंसल, राजेश सैनी, गिरीश चौबिसा, पुष्कर माली, अनुराग मेडतवाल, राकेश कुमार शर्मा भी उपस्थित थे।










