भारत में पुरुषों के साथ ही भारतीय महिला दार्शनिकों तथा साध्वियों की लम्बी परंपरा रही है। वेदों की ऋचाओं को गढ़ने में भारत की बहुत-सी स्त्रियों का योगदान रहा है उनमें से ही एक है गर्गवंश में व... Read more
‘महाभारत’ के वन पर्व में सावित्री और यमराज के वार्तालाप का प्रसंग आता हैः जब यमराज सत्यवान (सावित्री के पति) के प्राणों को अपने पाश में बाँध ले चले, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी। उ... Read more
आप के सामने इस अंक में एक माँ की सच्ची कथा प्रस्तुत की जा रही है जो भारतीय इतिहास में कहीं दबी पड़ी लुप्त प्राय ही थी। एक ऐसी माँ की कहानी जिसने अपनी संतानों को अपनी मीठी – मीठी लोरियां... Read more
माँ शबरी को श्रीराम के प्रमुख भक्त ों में गिना जाता है। शबरी का वास्तविक नाम ‘श्रमणा’ था। वह भील समुदाय की ‘शबरी’ जाति से थी। शबरी के पिता भीलों के राजा थे। शबरी जब विवाह के योग्य हुई तो उसक... Read more
एक बार सप्तर्षि गण बदरपाचन तीर्थ हिमालय पर्वत पर बारह वर्ष के लिए तपस्या करने चले गए। वे अरुंधति को जंगल में बने आश्रम में अकेला छोड़ गए। कहते हैं कि इस बीच भयंकर अकाल पड़ा, जो बारह साल तक चला... Read more
सुविख्यात पाश्चात्य इतिहासवेत्ता अर्नाल्ड टायनबी के शब्दों में ‘‘आज के उन्नत और विकसित, सभ्य कहे जाने वाले देशों के लोग जिस समय नदियों और तालाबों, झरनों में घुटनों के बल झुककर जानवरों की तरह... Read more
नारी सृष्टि का आधार है। नारी के बिना संसार की हर रचना अपूर्ण तथा रंगहीन है। नारी मृदु होते हुए भी कठोर है। उसमें पृथ्वी जैसी सहनशीलता, सूर्य जैसा ओज तथा सागर जैसा गांभीर्य एक साथ दृष्टिगोचर... Read more
16 नवंबर 1926 की घटना है। शहर था लाहौर, भगत सिंह, भगवती चरण बोहरा समेत कई क्रांतिकारी इकट्ठे थे। बीच में एक फोटो पर माला पड़ी हुई थी। वो तस्वीर थी करतार सिंह सराभा की, 19 साल की उम्र में अमेर... Read more
यह परतंत्र भारत के उस काल की घटना है, जब राजस्थान में छोटी बड़ी अनेक रियासतें थी। इन रियासतों में एक रियासत डूंगरपुर थी। जिसके शासक महारावल लक्ष्मण सिंह थे। इस समय भारत पर पूर्ण रूप से अंग्रे... Read more
भविष्य का भारत – संघ का दृष्टिकोण (तृतीय दिवस) प्रश्न- हिन्दुत्व के संबंध में। क्या हिन्दुत्व को हिन्दुईज्म कहा जा सकता है? देश में अन्य मत पंथों के साथ हिन्दुत्व का तालमेल कैसे संभव है? क्... Read more






