यदि पुलिस किसी को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करती है तो यह न सिर्फ भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता मतलब सीआरपीसी का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20, 21 और 22 में दिए गए मौलिक अधिकारों के भी विरुद्ध है। दरअसल, किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी से सम्बंधित प्रावधानों का उल्लेख सीआरपीसी में मिलता है, खासकर भाग-5 धारा-41 से धारा-61 ए उन सभी प्रक्रियाओं व कार्यों के बारे में उपबंध करता है जो प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों व कर्तव्यों से सम्बंधित है।
अब तक ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब पुलिस ने पर्याप्त कारण न होने के बावजूद भी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए लोगों को गिरफ्तार किया। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी गैर कानूनी तरीके से नहीं की जा सकती है तथा उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन कतई नहीं किया जा सकता है। यदि पुलिस के द्वारा ऐसा किया जाता है तो इसके विरुद्ध न्यायालय में रिट दायर की जानी चाहिए और मानवाधिकार आयोग में उचित शिकायत की जानी चाहिए। इसलिए पुलिस यदि आपको गिरफ्तार कर रही हो तो आपके कानूनी अधिकार निम्नलिखित हैं। इसलिए, आप इस बात को लेकर बिल्कुल आश्वस्त रहें कि पुलिस आपके साथ कतई कोई भी मनमानी नहीं कर सकती है।
आपको यह पता होना चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय ने डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और योगेंद्र सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में पुलिस गिरफ्तारी से संबंधित कानूनों का विस्तार से वर्णन किया है, जो इस प्रकार है-
सीआरपीसी की धारा 50 (1) के तहत पुलिस को गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी का मूल वजह बताना होगा। किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी को अपनी वर्दी में होना चाहिए और उसकी नेम प्लेट में उसका नाम स्पष्ट लिखा होना चाहिए।
सीआरपीसी की धारा 41 बी के मुताबिक पुलिस को एक अरेस्ट मेमो तैयार करना होगा, जिसमें गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी की रैंक, गिरफ्तार करने का सही समय और पुलिस अधिकारी के अतिरिक्त प्रत्यक्षदर्शी के भी दस्तखत होंगे। अरेस्ट मेमो में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति से भी हस्ताक्षर करवाना होगा। सीआरपीसी की धारा 50 (ए) के अनुसार, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को यह अधिकार होगा कि वह अपनी गिरफ्तारी की जानकारी अपने परिवार या रिश्तेदार को दे सके अथवा पुलिस अधिकारी को खुद इसकी जानकारी उसके परिवार वालों को अविलम्ब देनी होगी।
सीआरपीसी की धारा 54 में साफ-साफ कहा गया है कि यदि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति मेडिकल जाँच कराने की माँग करता है तो पुलिस उसकी मेडिकल जाँच कराएगी। क्योंकि मेडिकल जाँच कराने से फायदा यह होता है कि यदि आपके शरीर में कोई चोट नहीं है तो मेडिकल जाँच में इसकी पुष्टि हो जाएगी और यदि इसके बाद पुलिस कस्टडी में रहने के दौरान आपके शरीर में कोई चोट के निशान मिलते हैं तो पुलिस के खिलाफ आपके पास पक्का सबूत होगा। आम तौर पर मेडिकल जाँच होने के बाद पुलिस भी गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के साथ मारपीट नहीं करती है।
पुलिस किसी को भी अपनी मनमर्जी वाले तरीके से गिरफ्तार नहीं कर सकती, बल्कि उसे गिरफ्तारी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है। अन्यथा, गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाती है जिसमें पुलिस पर एक्शन भी लिया जा सकता है। यदि कोई पुलिस किसी को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करती है तो यह न सिर्फ भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता मतलब सीआरपीसी का उल्लंघन माना जाता है, बल्कि यह स्थिति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20, 21 और 22 में दिए गए मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है। लिहाजा, मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर पीड़ित पक्ष संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।
सीआरपीसी की धारा 57 के तहत पुलिस किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं ले सकती है। यदि कोई पुलिस किसी को 24 घंटे से ज्यादा अपने हिरासत में रखना चाहती है तो इसके लिए भी उसको सीआरपीसी की धारा 56 के तहत मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होगी।
सीआरपीसी की धारा 41डी के अनुसार गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को यह पूरा अधिकार होगा कि वह पुलिस जाँच के दौरान कभी भी अपने अधिवक्ता से मिल सकता है। साथ ही वह अपने अधिवक्ता और परिजनों से सामान्य बातचीत कर सकता है।
यदि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति गरीब है और उसके पास पर्याप्त रुपए-पैसे नहीं हैं तो उस स्थिति में उनको मुफ्त में कानूनी मदद दी जाएगी, मतलब उसको मुफ्त में एडवोकेट मुहैया कराया जाएगा। जहां तक महिलाओं की गिरफ्तारी का संबंध है तो सीआरपीसी की धारा 46 (4) स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले कदापि गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, यदि किसी परिस्थिति में किसी महिला को गिरफ्तार करना ही पड़ता है तो इसके सर्वप्रथम क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होगी। सीआरपीसी की धारा 46 के अनुसार महिला को केवल महिला पुलिसकर्मी ही गिरफ्तार करेगी। किसी भी परिस्थिति में किसी भी महिला को कोई पुरुष पुलिसकर्मी गिरफ्तार नहीं करेगा।
गोपाल पालीवाल











