समुत्कर्ष समिति द्वारा ‘‘सतर्कता रखिए, कोरोना अभी नियन्त्रित नहीं हुआ है’’ विषय पर 81 वीं समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। समुत्कर्ष समिति के समाज जागरण के प्रकल्प ऑनलाइन समुत्कर्ष विचार गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए सभी वक्ताओं का कहना था कि अब भी कोविड संक्रमण का खतरा बराबर बना हुआ है। वायरस को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इन दिनों यह संक्रमण फिर तेजी से फैल रहा है। इसलिये वास्तविक सावधानी, सर्तकता, शारीरिक दूरी, मास्क का प्रयोग, परंपरागत व आधुनिक उपचार आदि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत अब पहले से ज्यादा है। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी, वाली स्थिति गंभीर संकट का सबब बन सकती है। कोरोना का डर, खतरा भले ही थोड़ा कम हुआ है, लेकिन उसका फैलाव बहुत बढ़ गया है। कोरोना से संघर्ष की स्थितियां अब ज्यादा जटिल प्रतीत हो रही हैं भले ही अब इस महासंकट का अंत निकट दिखाई दे रहा है।
विषय का प्रवर्तन करते हुए समुत्कर्ष पत्रिका के संपादक वैद्य रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने कहा कि सावधान, कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। कोरोना को मात देने के लिए जरूरी है कि हम सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताए गए नियमों और बचाव के उपायों को अपनाएँ जिससे खुद सुरक्षित रहने के साथ ही दूसरों को भी सुरक्षित बना सकें। शारीरिक दूरी का पालन करें और मास्क जरूर लगाएँ। देश में कोरोना पोजीटिव व्यक्तियों की संख्या घटनी भले ही शुरू हो गई है, इसके बावजूद जब तक इसके लिए कोई वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक सभी को इससे बचाव करना जरूरी है।
गरिमा खंडेलवाल ने कोरोना पर काव्य पाठ करते हुए बताया कि हमें अब भी काफी सावधान रहने की जरूरत है। हमारे अंदर यह समझ पैदा न हो कि अचानक वायरस ने अपनी इच्छा से कम संक्रामक होने का फैसला ले लिया है। यह ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह अब भी जानलेवा है और फिर अपना क्रूर रूप दिखने लगा है।
अपनी बात रखते हुए चैनशंकर दशोरा ने कहा कि देश के अनेक इलाकों में संक्रमण थम गया है और लोग खतरा महसूस नहीं कर रहे हैं। देखने में यह भी आ रहा है कि जिन इलाकों में आज भी कोरोना कहर बरपा रहा है, वहां भी घोर लापरवाही बरती जा रही है, न शारीरिक दूरी की पालना हो रही है और न कोई मास्क पहन रहा है। जिन इलाकों में ज्यादा मरीज हैं, वहाँ इस शृंखला की पड़ताल और उसे तोड़ने की कोशिश अब पहले जैसी नहीं हो रही है।
विजन अकेडमी की प्राचार्या प्रतिमा सामर का कहना था कि कोरोना से बचने के दिशा-निर्देश एकदम स्पष्ट हैं। हर किसी को इतनी सावधानी तो सुनिश्चित करनी ही चाहिए कि किसी भी सूरत में खुद को कोरोना न हो, और यह मानकर अपना बचाव करना चाहिए कि कोरोना कहीं भी, किसी को भी हो सकता है। ठंड के कारण कोरोना की दूसरी लहर आ सकती है। इसलिए अब बहुत ज्यादा सावधानी की जरूरत है। योग और प्राणायाम इस युद्ध में हमारे अच्छे हथियार हो सकते हैं।
संदीप आमेटा ने कहा कि तमाम दावों और चेतावनियों के बीच एक और खुश करने वाली खबर आयी है कि कोरोना वैक्सीन के अन्तिम चरण के ट्रायल चल रहे हैं। रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-फाइव और अमरीकी कंपनी फाइजर के कोविड पर 90 प्रतिशत से अधिक नियंत्रण के दावे पूरे विश्व को राहत देने वाले हैं। उम्मीद है कि कम से कम एक टीका तो दिसम्बर या जनवरी की शुरुआत में आ सकता है। भारत ने कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता के बाद लोगों तक इसे जल्द से जल्द पहुँचाने की व्यवस्था तैयार कर ली है। इसके लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। पूरा विश्व कोरोना के लिए वैक्सीन की प्रतीक्षा कर रहा है।
इस अवसर पर नन्ही बालिका पाखी जैन ने कोरोना पर स्वरचित काव्य पाठ किया तथा रश्मि मेहता, डाॅ. अनिल कुमार दशोरा, मंगल जैन, हरिदत्त शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन शिक्षाविद् शिवशंकर खण्डेलवाल ने किया। इस ऑनलाइन विचार गोष्ठी में अमित कुमार चैधरी, अंतिम शर्मा, लोकेश जोशी, सुदर्शना भट्ट, अशोक कुमार जैन, कविता शर्मा और पप्पूलाल प्रजापत भी सम्मिलित हुए।
शिवशंकर खण्डेलवाल










