यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, वे पौधे व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे। परिमल-हीन पराग दाग सा बना पड़ा है, हा!... Read more
कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे, आजाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे। हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से, तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे। बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरखे क... Read more
चलो देश का मान बढ़ाते बढ़े चलें, अंधकार में दीप जलाते बढ़े चलें। हम श्रम से मिट्टी को सोना कर देंगे, हम फूलों से बाग देश का भर देंगे। प्यारा-प्यारा देश हमारा, अमर रहे, हम सूरज बनकर घर-घर में धू... Read more
नया कोई गीत ले जंग चलो जीत ले घटती है नम्रता बढ़ती उद्विग्नता चुकती शालीनता मीठा पाया है बहुत आज चलो तीत ले कथनी को तोल दे दूजों को मोल दें वातायन खोल दे भीड़ भरी दुनियाँ में खोज नया मीत लें द... Read more
दीपक में पतंग जलता क्यों? प्रिय की आभा में जीता फिर दूरी का अभिनय करता क्यों पागल रे पतंग जलता क्यों? उजियाला जिसका दीपक है मुझमें भी है वह चिनगारी अपनी ज्वाला देख अन्य की ज्वाला पर इतनी ममत... Read more
लपेटे सारे चाँद तारे नीलांबर सा गहरा पूरा ब्रह्मांड इस में समाया दुनिया से बचाए मेरी माँ का आँचल जैसे मुझ पर पहरा। ैं उनकी प्यारी सी गुड़िया उनकी आँखों का तारा ममता का सागर नरम मुलायम मेरी मा... Read more
मेरे गाँव की मिट्टी से, मुझे प्यार बहुत है ये नौकरी के खातिर, कोसों की दूरी है। मेरे गाँव की मिट्टी, बहुत निराली है यहाँ के ढ़ले कभी, बिगड़ते नहीं है। हाथी घोड़े खिलौने, बर्तन वो मिट्टी के मिट्... Read more
एक पंजे पर अभागा खींचता बोझ जिंदगी का सिकुड़ता एडी के बल डामर जेष्ठ में तपता अनुप्राणित बचपन बोझिल आँखें खोजती जीवन शिराओं का पोषण महामारी के चंगुल में हाथ फैलाए अनुप्राणित बचपन संघर्ष से पड़े... Read more






