समुत्कर्ष समिति द्वारा ‘‘संकल्प एवं समरसता का पर्व रक्षा बन्धन’’ विषय पर 89 वीं समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। समुत्कर्ष समिति के समाज जागरण के प्रकल्प ऑनलाइन समुत्कर्ष विचार गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए सभी वक्ताओं का कहना था कि प्राचीनकाल से ही अपने देश के उत्सव सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ाने वाले रहे हैं। रक्षाबंधन इसी परंपरा का स्मरण कराता है। राखी के सुकोमल पवित्र धागों से भाई-बहन के साथ साथ सामान्य जन के हृदय जोड़ने वाले समाज उत्सव का नाम ही रक्षाबंधन है। रक्षाबंधन के पर्व पर यह पुनीत संकल्प लेने का सुअवसर है कि हम भेदभाव और छूआछूत की दीवारें ढहा दें। मंगलाचरण एवं विषय का प्रवर्तन करते हुए समुत्कर्ष पत्रिका संपादक वैद्य रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने बताया कि भारतीयसमाज व संस्कृति में रक्षा बन्धन का अत्यंत महत्व है। इस पर्व अर्थ बहन द्वारा भाई के हाथों में राखी बंधवाना ही एकमात्र उद्देश्य नहीं है अपितु रक्षाबंधन पर्व का महत्व वर्तमान राजनैतिक, सामाजिक परिस्थितियों में और भी धिक बढ़ गया है। देश वर्तमान समय में चारों ओर से चुनौतियों से घिरता चला जा रहा है। हम इस रक्षासूत्र के अवसर पर अपने देश व समाज को एकसूत्र में पिरेाकर रखने भी संकल्प लेते हैं।
राजेंद्र बंसल ने इस अवसर पर कहा कि श्रावणी पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन नारी अस्मिता और उसकी रक्षा का पर्व तो है ही, सामाजिक समरसता को बढ़ाने का भी अवसर है। रक्षासूत्र बँधवाने का काम तभी सफल होग जब देश का युवा हर नारी को सम्मान दे और समाज में बढ़ रही अपराधिक वृत्तियों के रोकथाम में सहायक बने। सुबोध मालोत ने कहा कि वैदिक मन्त्र ‘‘सह नाववतु’’ अर्थात्ह म दोनों परस्पर मिलकर रक्षा करें का यही सन्देश है कि समाज के सभी वर्ग रक्षाबंधन के दिन परस्पर के मतभेदों कि भुलाकर धागे के पवित्र सूत्र में एक दूसरे को बाँधकर परस्पर रक्षा करके समतायुक्त समरस समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाए।
विद्यासागर ने कहा कि हिन्दू जीवन पद्धति व्यक्ति मूलक होते हुए भी व्यक्ति केन्द्रित ना होकर समाजाभिमुख है। इसी कारण इन पर्वों पर लिये जाने वाले संकल्प, किये जाने वाले व्रत, पूजन स्वयं के लिये ना होकर समष्टि के कल्याण के लिये होते हैं। रक्षाबन्धन के दिन भी संकल्प इसी सामूहिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिये लेना है। इस अवसर पर गोपाल लाल माली, रश्मि मेहता, और हरिदत्त शर्मा भी अपने विचार व्यक्त किए। समुत्कर्ष पत्रिका के उपसंपादक गोविन्द शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए आभार प्रदर्शन किया। संचालन शिक्षाविद् शिवशंकर खण्डेलवाल ने किया।
इस ऑनलाइन विचार गोष्ठी में दर्शना व्यास, सुरेंद्र पालीवाल, वीणा जोशी, गौरीशंकर हुड्डा, राजेन्द्र काबरा, राकेश शर्मा, अनु पारेटा, लोकेश जोशी, भारत गौड, विद्यासागर, तरुण शर्मा, प्रदीप चैबीसा भी सम्मिलित हुए।
शिवशंकर खण्डेलवाल










