सुरेश परिश्रमी और बुद्धिमान लड़का था। वह नियमित रूप से स्कूल का गृहकार्य करने और उसे समझने के बाद ही सोता था। सुरेश की माँ और छोटा भाई दीपक सौतेले थे। उसकी माँ के मरने के बाद उसके पिताजी ने दूसरी शादी कर ली थी। कुछ मोहल्ले वाले तथा सुरेश के दोस्त कहा करते थे कि सौतेले तो सौतेले ही होते हैं। सौतेला भाई कभी सगे भाई जैसा प्यार नहीं करता और सौतेली माँ अत्याचार करती है, मारपीट करती है। यह सब सुनकर सुरेश के मन में सौतेली माँ के प्रति घृणा पैदा हो गई थी। सुरेश अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। उसका छोटा भाई दीपक उसके लिए दूध का गिलास लाया और बड़े स्नेह भाव से कहने लगा, ‘‘लो सुरेश भैया दूध पी लो।’’
‘‘मुझे नहीं पीना दूध।’’ सुरेश ने मुँह फिराते हुए कहा।
‘‘नहीं भैया, गुस्सा नहीं करते। इतनी पढ़ाई करते हो। दूध नहीं पीओगे तो कैसे चलेगा?’’ दीपक ने समझाते हुए कहा।
‘‘नहीं पीना मुझे दूध। ले जाओ इसे यहाँ से….. कहते हुए जैसे ही सुरेश ने गुस्से में अपना हाथ फैलाया तो दूध का गिलास जमीन पर जा गिरा।
दीपक सहमा हुआ एक तरफ खड़ा हो गया। इतने में सुरेश की माँ वहां पर आ गई। माँ ने दूध फैला हुआ देखा तो सिसकने लगी।
‘‘देखो सुरेश, मैं और दीपक तुम्हें कितना चाहते हैं। फिर तुम ऐसा क्यों करते हो? सुरेश बेटा, दीपक तो तुमसे इतना छोटा है कि इसे तो यह भी मालूम नहीं है कि तुम इसके सौतेले भाई हो। मैं तुम्हारा पूरा ध्यान रखती हूँ। मैंने कभी तुम्हें सौतेला नहीं समझा। कहते कहते सुरेश की माँ सुबकने लगी।
सुरेश एक तरफ मुँह किए चुपचाप बैठा रहा।
कांच की गिलास के टुकड़े उठाते हुए एक टुकड़ा माँ की हथेली में धंस गया। माँ के मुँह से चीख निकल पड़ी। हथेली से खून निकलने लगा। सुरेश चुपचाप बैठा यह सब देखता रहा। माँ और दीपक कमरे से बाहर आ गए।
शाम को सुरेश के पापा आफिस से घर आए। दीपक ने दरवाजा खोला। इधर जब उन्होंने सुरेश के कमरे में देखा तो वह पढ़ाई कर रहा था, इसलिए उसे आवाज लगाना ठीक नहीं समझा। वे दीपक से गपशप करने लगे। थोड़ी देर बाद सुरेश भी पापा के पास आ कर बैठ गया।
इतने में सुरेश की माँ चाय लेकर वहाँ पर आ गई। चाय की ट्रे टेबल पर रखी तो सुरेश के पापा ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘यह चोट कैसे लगी?‘‘
‘‘कुछ नहीं, बस छोटा काँच का टुकड़ा हथेली में धँस गया था।’’ सुरेश की माँ ने कहा।
‘‘ लेकिन यह हुआ कैसे?’’ सुरेश के पिताजी ने पूछा।
‘‘मैं गिलास साफ कर रही थी कि हाथ से छूट गई। काँच के टुकड़े को उठा रही थी तो बस जरा सी लग गई।’’ सुरेश की माँ ने बड़ी सहजता से कहा।
बात को साधारण समझ कर सुरेश के पापा अपने कमरे में कपड़े बदलने चले गए। अचानक उन्हें सुरेश के सुबकने की आवाज सुनाई दी। वे लौटकर सुरेश के पास आए और रोने का कारण पूछने लगे।
सुरेश की आंखों से आँसू थम नहीं रहे थे। उसे आज मालूम हुआ कि उसकी सौतेली माँ उससे कितना प्यार करती है। अगर माँ और दीपक पिताजी को सच बता देते तो उसकी पिटाई होती।
सुरेश अपने आप को नहीं रोक सका। वह दौड़कर माँ से लिपट गया और कहने लगा, ‘‘मुझे माफ कर दो माँ। मैंने हमेशा आपको गलत समझा। मुझे आज मालूम चल चुका है कि आप और दीपक दोनों मुझसे कितना प्यार करते हो। अब मैं कभी दोनों का दिल नहीं दुखाऊंगा।’’
माँ ने सुरेश का चेहरा चूम लिया। आज सुरेश की समझ में आया कि माँ आखिर मां होती है। माँ की ममता महान है।
सुरेश का सिर माँ की गोद में था। माँ बेटे को इस तरह देख पापा की आंखों से प्रेम के आंसू छलक पड़े। दीपक भी खुशी से दौड़ता हुआ सुरेश से जा लिपटा।
तरुण कुमार दाधीच











