हिन्दू संस्कृति सनातन है। सनातन का अर्थ है ‘शाश्वत’। वह चिर पुरातन होते हुए नित्य नूतन भी है। अपनी संस्कृति के इस अनोखे सामथ्र्य के अनेक कारण हैं। उन कारणों में से एक है हमारा हिन्दू परिवार, हमारी हिन्दू कुटुम्ब व्यवस्था।कहा जाता है कि ‘जो परिवार भोजन साथ करता है, वह एकजुट रहता है।’ परन्तु आज के आधुनिकीकरण की दौड़ में भाग रहे समाज में परिवारों की यह भूमिका दुर्बल होती जा रही है। हमारी आज की शिक्षा प्रणाली में ऐसी श्रद्धा-निर्माण करने की सोच ही नहीं है। वह पूर्णतः निर्धर्मी है। वह श्रद्धा का नाश करने का ही प्रयत्न करती है। समाज में बढ़ रही आत्महत्या और मतान्तरण जैसी प्रवृत्तियाँ इसी का परिणाम हैं।
इस घातक परिस्थिति को बदल कर हमारे सभी परिवारों को ‘श्रेष्ठ व्यक्ति के निर्माण केंद्र’ बनाने के लिए एक ही उपाय है। हमारे परिवारों को संस्कार देनेवाले केंद्र- यानि जो अच्छा है उसको करके ही रहेंगे और जो बुरा है उस को कभी नहीं करेंगे, ऐसा मनोबल निर्माण करने वाले केन्द्र बनाना है। इस आशय को पूर्ण करने के लिए परिवार की दिनचर्या, संभाषण, आदतें उसके अनुसार विकसित हों, इसको ही जीवनशैली कहते हैं। हिन्दुत्व एक जीवन शैली है। हमारे परिवार ऐसी जीवनशैली को दर्शानेवाले, सिखानेवाले होने चाहिए। हम सब मिलकर एक व्यवहार योग्य परिवार प्रणाली को सबके सामने प्रस्तुत करें जिसके पालन करने से अपनी परिवार व्यवस्था तथा अपनी समाज व्यवस्था सक्षम और सुदृढ़ बने। इस आशय से यह ‘परिवार प्रबोधन’ का प्रारूप आप के अवलोकन के लिए प्रस्तुत किया गया है। जिसे आवश्यक संशोधन के साथ आप अपना सकते हैं।
अपना परिवार कैसा है?
- अन्य परिवारों को अपने परिवार से सीखना चाहिए, ऐसा कौन सा विषय अपने घर में है?
- परिवार के सभी व्यक्तियों द्वारा मिलकर करने योग्य काम क्या-क्या हैं?
- दिन में कम से कम एक बार मिलकर भोजन करना।
- दिन में कम से कम एक बार मिलकर भजन करना।
- दिन में कम से कम एक बार मिलकर खेल खेलना।
- सप्ताह में एक बार सब मिलकर घर की सफाई करते हैं क्या?
- सप्ताह में एक बार सब मिलकर गीत-भजन गाते हैं क्या?
- आपने बच्चों को अपना कौन सा गुण सिखाया है?
- आपने बच्चों को अपना कौन सा काम सिखाया है?
- आपने बच्चों में अपनी कौन सी आस्था निर्माण की है?
- आपने बच्चों को 12 वर्ष पूरा होने के पहले आपको अपने माता-पिता से मिला उत्तम विचार, आचार या आस्थाओं को सिखाया है क्या?
- कम से कम अपने घर में इसको करना ही चाहिए और इसको कभी नहीं करना ऐसा विधि निषेध सिखाया है क्या?
- घर में ‘मैं‘ और ‘मेरा‘ इन शब्दों का उपयोग ज्यादा होता है या ‘हम और अपना ‘ इन शब्दों का उपयोग ज्यादा होता है?
- आपके बहुत आत्मीय ऐसे परिवार कितने हैं? पहचान कर सकते हैं क्या?
- ऐसे घरों में आप कितने दिनों में एक बार जाते हैं?
- वे आप के घर कब आते हैं?
- ऐसे परिवारों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है या घट रही है?
- आप के पड़ोसी चार-पाँच परिवार कभी मिलते रहते हैं क्या? भजन के लिए, गाने के लिए, या कोई विषय सीखने के लिए?
- आपको आप के सभी रिश्तेदार मालूम हैं क्या? वर्ष में कम से कम एक बार उन सबको देखते हैं क्या?
- ऐसे सभी रिश्तेदार वर्ष में एक बार कुटुम्ब मिलन में सम्मिलित होते हैं क्या?
- आपके कुलदेवता के बारे में आप को क्या-क्या मालूम है? आप के बच्चों को क्या मालूम है?
- आप के परिवार में ईश्वर का क्या स्थान है?
- जन्म दिन हिन्दू पद्धति से- तिथि, नक्षत्र के अनुसार मनाते हैं या क्रिश्चियन पद्धति से- डेट, केक, कैंडल से मनाते हैं?
- परिवार में भोजन के लिए निश्चित स्थान, निश्चित समय और निश्चित क्रम है क्या? या टी. वी. देखते हुए खाते हैं? क्या, वह ठीक है?
- परिवार में आप सभी बन्धु स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करते हैं क्या?
- परिवार में सब मातृभाषा में ही बोलते हैं क्या?
- जब घर में रहते हैं तब अपने देश की वेश-भूषा में ही रहते हैं क्या?
- परिवार में सब नित्य स्नान, ध्यान, व्यायाम करते हैं क्या?
- परिवार में सब सप्ताह में एक बार शरीर को तेल लगाकर अभ्यंजन करते हैं क्या?
- परिवार में सब पक्ष में एक बार व्रत उपवास करते हैं क्या?
- परिवार में सब वर्ष में एक बार किसी सेवा केन्द्र में जाकर एक दिन का सेवा-अभ्यास करते हैं क्या?
- आपके परिवार में हर मास ‘आपद्धन’ के नाम पर कुछ धन बचाकर रखते हैं क्या?
- परिवार में टी. वी. मोबाईल, कम्प्यूटर और कार इत्यादि यंत्रों के बारे में कोई विधि निषेध हैं क्या? याने क्या करना और क्या नहीं करना ऐसे नियम हैं क्या?
कमियों को सम्हालना, अच्छाईयों को उछालना
घर के किसी सदस्य में विशेष कर बच्चों में कई कमियाँ भी होती हैं। कुछ बच्चे पढ़नें में कमजोर होते हैं। यदि हम बच्चों के सामने उसकी कमियों की चर्चा किसी अन्य से करेंगे या बच्चे से भी हर समय कमियों की चर्चा करेंगे तो बच्चे की कमियाँ दूर होने के स्थान पर ढीठ होने का खतरा अधिक है या वह स्वाभिमान हीनता से ग्रस्त हो सकता है।
अतः माता-पिता को चाहिए कि बच्चों के विकास के लिए उनमें उत्साह भरें उनमें जो अच्छे गुण हैं उनकी चर्चा अधिक करें। कभी-कभी ऐसा होता है कि पति पत्नी में भी किसी विषय पर मतभेद हो जाता है तो ऐसे मतभेदों की चर्चा बच्चों के सामने करने से बचना चाहिए।
पारिवारिक चर्चा करने योग्य विषय
- अपना कुलदृपूर्वज और उनकी उपलब्धियाँ।
- हमारे पिताजी, दादाजी, नानीजी और उनकी विशेषताएँ।
- हमारी माताजी, दादीजी, नानीजी और उनकी विशेषताएँ।
- हमारे कुलदेवता, हमारा गाँव और वहाँ के उत्सव आदि।
- हमारे कुल पुरोहित जी।
- हमारा गोत्र, ऋषि और द्रष्टा।
- हमारे रिश्ते दृ अपने देश में।
- हमारे रिश्ते दृ बाहर के देशों में।
- हमारा भारत दृ यहाँ पर जन्म लेने का महत्त्व।
- हमारी भाषा, देश की अन्य भाषाएँ और अंग्रेजी भाषा।
- हमारा व्यवसाय।
- वेद, स्मृति, पुराण, इतिहास, रामायण-महाभारत।
- संकल्प एवं काल-गणना।
- भगवान कहाँ है? वे कौन सी भाषा जानते हैं? उनका नाम क्या है?
- मानव जीवन का लक्ष्य क्या है? पुरुषार्थ क्या है? हर व्यक्ति को भगवान बनना है।
- संसार मानव के लिए या मानव, संसार के लिए?
- हमारी संस्कृति के शब्द जिनका भाषांतर अंग्रेजी आदि अन्य भाषाओं में करना संभव नहीं है। जैसे ……..पुण्य, नैवेद्य (भोग चढ़ाना), प्रसाद, अभिषेक, तीर्थ, प्रदक्षिणा और धर्म आदि।
- जन्मदिन-तिथि, नक्षत्र के आधार पर चिÐित करना, और उसी प्रकार मनाना, और हिन्दू पद्धति से ही मनाना।
- हमारे विचार के समाचार पत्र।
- अपने देश के ऊपर हुए आक्रमण।
- आयुर्वेद।
- अच्छे समाचार पत्र, सी.डी. कैसेट्स।
- घर में रखने योग्य चित्र (च्ीवजव) ।
- घर में खेलने योग्य खेल।
- कहावत, मुहावरे, पहेलियाँ।
- कहानियाँ।
मातृ शक्ति की प्रतिष्ठा कायम रखते हुए परिवार प्रबोधन वर्तमान समय की आवश्यकता है। जगत-जननी, प्रकृति, पुरुष, यह प्राकृतिक रचना है। हमारी संस्कृति में सभी के समान होने की भावना है। देश में विदेशी आक्रमणों के कारण समानता की भावना नष्ट हो गई। वर्तमान समय में परिवार संस्था की रक्षा के लिए परिवार का प्रबोधन करने की आवश्यकता है।
गोपाल लाल माली (सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य)










